July 20, 2026 06:52:34 pm

STF उत्तराखण्ड और ड्रग्स विभाग की बड़ी कार्रवाई: बाजपुर में नकली दवाइयों और अवैध शराब के सिंडिकेट का भंडाफोड़, लाखों टैबलेट, हजारों सिरप और भारी मात्रा में शराब बरामद

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STF उत्तराखण्ड और ड्रग्स विभाग की बड़ी कार्रवाई: बाजपुर में नकली दवाइयों और अवैध शराब के सिंडिकेट का भंडाफोड़, लाखों टैबलेट, हजारों सिरप और भारी मात्रा में शराब बरामद

नामी कंपनियों के नाम पर बन रही थीं नकली जीवनरक्षक दवाइयाँ,एक आरोपी गिरफ्तार

tahalka1news

देहरादून/बाजपुर। मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड के निर्देशों के क्रम में जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) उत्तराखण्ड ने एक बड़ी और महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए ऊधमसिंह नगर जनपद के बाजपुर स्थित एक फैक्ट्री में संचालित नकली दवाइयों के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ कुमाऊँ यूनिट, औषधि प्रशासन विभाग, स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम द्वारा की गई इस छापेमारी में भारी मात्रा में नकली एलोपैथिक दवाइयाँ, पैकेजिंग मशीनें, कच्चा माल, अवैध अंग्रेजी शराब, आबकारी होलोग्राम और पैकिंग सामग्री बरामद की गई है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ उत्तराखण्ड के निर्देशन में गठित संयुक्त टीम ने बाजपुर के औद्योगिक क्षेत्र स्थित कोविल बायोटैक (प्लॉट संख्या एफ-13 एवं एफ-14) पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान धीरेन्द्र पुत्र ब्रह्म सिंह, निवासी जनपद बुलन्दशहर (उत्तर प्रदेश) को गिरफ्तार किया गया।

जांच में सामने आया कि अभियुक्त बिना किसी वैध एलोपैथिक औषधि निर्माण लाइसेंस के केवल आयुर्वेदिक एवं फूड लाइसेंस की आड़ में देश की प्रतिष्ठित दवा कंपनियों स्टॉडमेड, मैकलेओड्स, इंटास, सन फार्मा सहित अन्य नामी ब्रांडों के नाम से नकली एलोपैथिक दवाइयाँ तैयार कर रहा था। इन दवाइयों की पैकेजिंग इस प्रकार की जाती थी कि आम उपभोक्ता और दवा विक्रेता आसानी से धोखा खा जाएँ। बाद में इन्हें विभिन्न बाजारों में असली दवाओं के रूप में सप्लाई किया जाता था।

पूछताछ और जांच के दौरान अभियुक्त की निशानदेही पर एनएच-74 स्थित एक गोदाम में भी छापेमारी की गई, जहाँ से तैयार नकली दवाइयों का बड़ा जखीरा, पैकिंग सामग्री तथा भारी मात्रा में अवैध अंग्रेजी शराब बरामद हुई। अभियुक्त ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर हरियाणा से अवैध शराब मंगाकर उत्तराखण्ड में उसकी सप्लाई भी करता था।

संयुक्त टीम ने फैक्ट्री और गोदाम से लगभग एक लाख टैबलेट और 15 हजार से अधिक सिरप की बोतलें बरामद कीं। इनमें अम्लता (एंटासिड), जीवाणु संक्रमण (एंटीबायोटिक), दर्द एवं सूजन, नसों के दर्द (न्यूरोपैथिक पेन), प्रोस्टेट संबंधी रोग, कैल्शियम एवं विटामिन की कमी तथा आयरन सप्लीमेंट जैसी महत्वपूर्ण बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाइयाँ शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी नकली दवाइयाँ मरीजों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक साबित हो सकती हैं और कई मामलों में जानलेवा भी हो सकती हैं।

बरामद दवाइयों में अल्कासोल की 2400 बोतलें, केफाइन-200 की 11200 टैबलेट, वेलटम, निमुफिन, सनक्लेव, रूबीरेड सस्पेंशन, ओस्टोकैल्शियम बी-12 सस्पेंशन, वेलटम प्लस, गाबापिन तथा सोम्पराज जैसी बड़ी मात्रा में नकली दवाइयाँ शामिल हैं।

कार्रवाई के दौरान मैकडोवेल नंबर-1 के 1632 क्वार्टर, आरसीएस (चंडीगढ़ मार्क) की 1016 बोतलें, शराब के ढक्कन, रैपर, एक हजार खाली क्वार्टर, उत्तराखण्ड आबकारी विभाग के होलोग्राम तथा अन्य पैकेजिंग सामग्री भी बरामद की गई। इसके अलावा नकली दवाइयों के निर्माण में प्रयुक्त स्टेनलेस स्टील टैंक, फिलिंग मशीन, सीलिंग मशीन, लेबलिंग मशीन और अन्य आधुनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं।

गिरफ्तार अभियुक्त धीरेन्द्र के विरुद्ध थाना बाजपुर में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं अवैध शराब की बरामदगी के मामले में उत्तराखण्ड आबकारी अधिनियम के तहत भी अलग से कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

इस महत्वपूर्ण कार्रवाई का नेतृत्व एसटीएफ इंस्पेक्टर विकास चौधरी ने किया। टीम में एसआई विपिन चंद्र जोशी, एसआई केजी मठपाल, हेड कांस्टेबल महेंद्र गिरी, हेड कांस्टेबल रविंदर सिंह, हेड कांस्टेबल किशोर कुमार, कांस्टेबल जितेंद्र कुमार तथा तकनीकी सहायक किशन चंद्र शर्मा शामिल रहे। औषधि प्रशासन विभाग की ओर से सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर नीरज कुमार, सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर मीनाक्षी बिष्ट, ड्रग इंस्पेक्टर निधि शर्मा, शुभम कोटनाला एवं अर्चना उप्पल ने कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्थानीय पुलिस की ओर से एसआई सुरेंद्र सिंह, एसआई देवेंद्र सिंह मेहता, कांस्टेबल समीर चौहान तथा आबकारी विभाग की ओर से इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह बिष्ट एवं इंस्पेक्टर कृष्ण चंद भी संयुक्त अभियान का हिस्सा रहे।

एसटीएफ उत्तराखण्ड ने स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे अपराधियों के खिलाफ भविष्य में भी इसी प्रकार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश, सप्लाई चेन और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की जा रही है, ताकि इस संगठित गिरोह का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।

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