June 26, 2026 11:38:01 pm

STF की बड़ी कार्रवाई: ट्रामाडोल कैप्सूल तस्करी गिरोह का एक और सदस्य गिरफ्तार, 77 पेटियों की सप्लाई का खुलासा

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STF की बड़ी कार्रवाई: ट्रामाडोल कैप्सूल तस्करी गिरोह का एक और सदस्य गिरफ्तार, 77 पेटियों की सप्लाई का खुलासा

18 हजार ट्रामाडोल कैप्सूल बरामदगी मामले में सामिल तस्करी गिरोह का एक और सदस्य गिरफ्तार

tahalka1news

देहरादून। उत्तराखंड में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) लगातार बड़ी कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री के “ड्रग्स फ्री देवभूमि” अभियान को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान के क्रम में एसटीएफ/एएनटीएफ उत्तराखंड ने ट्रामाडोल तस्करी गिरोह के एक और सक्रिय सदस्य अंकित कुमार प्रजापति को गिरफ्तार कर एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी मुख्य तस्कर के लिए उत्तराखंड में रिसीवर और डिस्ट्रीब्यूटर का काम करता था तथा हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल की सप्लाई कर रहा था।

एसटीएफ के अनुसार इस पूरे मामले की शुरुआत 11 मई 2026 को हुई थी, जब एसटीएफ/एएनटीएफ और थाना मंगलौर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए हरिद्वार जनपद के मंगलौर क्षेत्र से 18,000 प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल बरामद किए थे। इस बरामदगी के बाद थाना मंगलौर में एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचना स्पेशल टास्क फोर्स देहरादून को सौंपी गई।

जांच के दौरान एसटीएफ ने पहले गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी सचिन मनिहाल से पूछताछ की। उसके मोबाइल फोन, बैंक खातों, डिजिटल डाटा और तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया गया। इसी जांच में अंकित कुमार प्रजापति की अहम भूमिका सामने आई। जांच एजेंसियों को पता चला कि जनवरी 2026 से अंकित लगातार मुख्य आरोपी से SPASMORE (Tramadol) Capsules की खेप प्राप्त कर हरिद्वार, रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में अवैध रूप से सप्लाई कर रहा था।

विवेचना के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी को जनवरी 2026 से अब तक करीब 77 पेटियां, यानी लगभग 6,930 डिब्बे प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल विभिन्न खेपों में प्राप्त हुए थे। इन दवाओं की अवैध बिक्री से होने वाली रकम में आरोपी पहले अपना कमीशन काटता था और शेष धनराशि नकद तथा बैंक खातों के माध्यम से मुख्य आरोपी तक पहुंचा देता था। जांच अधिकारियों ने बैंक ट्रांजैक्शन और आर्थिक लेन-देन का मिलान किया तो कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए, जिन्होंने पूरे नेटवर्क की पुष्टि कर दी।

एसटीएफ की तकनीकी जांच में यह भी सामने आया कि पुलिस की कार्रवाई तेज होने के बाद आरोपी ने खुद को बचाने के लिए अपने मोबाइल फोन से मुख्य आरोपी के साथ हुई व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल डाटा डिलीट कर दिए थे। हालांकि डिजिटल फोरेंसिक जांच, तकनीकी विश्लेषण और बैंक रिकॉर्ड ने आरोपी के इन प्रयासों को विफल कर दिया। जांच एजेंसियों ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की भूमिका को पूरी तरह प्रमाणित किया।

पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद एसटीएफ की टीम ने विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए अंकित कुमार प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान उसके कब्जे से एक JIO कीपैड मोबाइल फोन और एक VIVO V50e स्मार्टफोन बरामद किया गया। दोनों मोबाइल फोन को महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मानते हुए पुलिस ने कब्जे में लेकर सीज कर दिया है। इन मोबाइलों की फोरेंसिक जांच के माध्यम से अब पूरे तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी कोई नया अपराधी नहीं है। उसके विरुद्ध पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में पहले से चार आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह गिरोह उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों में भी सक्रिय था और प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई का नेटवर्क काफी व्यापक हो सकता है। इसी कारण एसटीएफ अब आरोपी के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक, बैंक खातों, आर्थिक लाभ, मोबाइल डाटा और पूरे सप्लाई चैन की गहराई से जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी जल्द कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

इस महत्वपूर्ण कार्रवाई को निरीक्षक यादवेन्द्र सिंह बाजवा के नेतृत्व में उपनिरीक्षक कमाल हसन, उपनिरीक्षक दीपक मैठाणी, हेड कांस्टेबल मनमोहन, हेड कांस्टेबल कैलाश नयाल, कांस्टेबल रवि पंत तथा कांस्टेबल दीपक नेगी की टीम ने अंजाम दिया।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि नशा समाज और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। यदि किसी व्यक्ति को मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध दवाओं की बिक्री या नशे से संबंधित किसी भी गतिविधि की जानकारी मिलती है तो वह तत्काल स्थानीय पुलिस, एसटीएफ/एएनटीएफ उत्तराखंड या हेल्पलाइन नंबरों पर सूचना दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाने के लिए एसटीएफ का अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा और नशा तस्करों के खिलाफ लगातार प्रभावी कार्रवाई की जाती रहेगी।

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