सिकरोड़ा में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, हजरत बाबा मोहब्बत अली शाह व बाबा शरीफ अहमद शाह का सालाना उर्स सम्पन्न
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सिकरोड़ा में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, हजरत बाबा मोहब्बत अली शाह व बाबा शरीफ अहमद शाह का सालाना उर्स सम्पन्न
दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड समेत कई राज्यों से पहुंचे जायरीन, अमन-चैन और खुशहाली की मांगी दुआएं
tahalka1news
भगवानपुर/कलियर, 18 जून। तहसील भगवानपुर के ग्राम सिकरोड़ा में स्थित हजरत बाबा मोहब्बत अली शाह रहमतुल्लाह अलैह एवं हजरत बाबा शरीफ अहमद शाह रहमतुल्लाह अलैह चिश्तिया साबरी दीदार शाही सिकरोड़वी का 40वां और 10वा सालाना उर्स मुबारक बुधवार को कुल शरीफ और सामूहिक दुआ के साथ सम्पन्न हो गया। दो दिवसीय धार्मिक आयोजन में हजारों की संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर दरगाह पर चादरपोशी की तथा देश-प्रदेश में अमन, शांति, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी।
उर्स मुबारक के दौरान दरगाह परिसर में सुबह से देर रात तक जायरीनों की भारी भीड़ देखने को मिली। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचे मुरीदों और अकीदतमंदों ने दरगाह पर हाजिरी लगाकर अपनी अकीदत का इजहार किया। इस दौरान कुरानखानी, चादरपोशी, महफिल-ए-समा, कुल शरीफ और लंगर तकसीम जैसी धार्मिक रस्में अदा की गईं।
दरगाह के सज्जादानशीन सूफी जहीर अहमद ने बताया कि हजरत बाबा मोहब्बत अली शाह का 40वा और हजरत बाबा शरीफ अहमद शाह का 10वा उर्स मनाया जा रहा है उन्होंने उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि अपने जीवनकाल में इंसानियत, प्रेम, सेवा और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने हमेशा गरीबों, मजदूरों, जरूरतमंदों और मजलूमों की सहायता को प्राथमिकता दी तथा समाज में आपसी सौहार्द कायम रखने की शिक्षा दी। उनके बताए हुए मार्ग पर चलते हुए आज भी हजारों लोग इंसानियत और मोहब्बत का संदेश आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि हजरत बाबा शरीफ अहमद शाह अपने पीर-ओ-मुर्शिद हजरत बाबा मोहब्बत अली शाह की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए गांव-गांव साइकिल से भ्रमण करते थे और लोगों को प्रेम, भाईचारे तथा नेक राह पर चलने की प्रेरणा देते थे। उनकी इन्हीं शिक्षाओं के कारण क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की मजबूत परंपरा कायम रही।
उर्स के दौरान आयोजित महफिल-ए-समा में सूफियाना कलाम और मनकबतों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर कर दिया। वहीं दरगाह पर अकीदतमंदों ने फूल और चादर पेश कर अपनी मुरादों के लिए दुआएं मांगीं। समापन अवसर पर आयोजित विशेष दुआ में देश की तरक्की, समाज में भाईचारा तथा विश्व शांति की कामना की गई।
इस अवसर पर इंजीनियर मुजाहिर हुसैन, सूफी मुजम्मिल हुसैन साबरी, इंजीनियर मुदस्सिर हुसैन सहित दरगाह इंतजामिया कमेटी के सदस्य, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। सभी ने दरगाह पर चादर पेश कर मुल्क में अमन-ओ-अमान और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की।
उर्स के सफल आयोजन पर सज्जादानशीन सूफी जहीर अहमद ने सभी मेहमानों, अकीदतमंदों, दरगाह कमेटी के पदाधिकारियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बुजुर्गों की शिक्षाएं आज भी समाज को प्रेम, एकता और इंसानियत का रास्ता दिखा रही हैं। उन्होंने लोगों से बुजुर्गों की तालीमात पर अमल करते हुए समाज में भाईचारा और सौहार्द कायम रखने की अपील की।

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