February 4, 2026 08:18:51 am

प्रेमिका द्वारा 2020 की चर्चित हत्या का फैसला, महिला समेत दो दोषियों को आजीवन कारावास

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प्रेमिका द्वारा 2020 की चर्चित हत्या का फैसला, महिला समेत दो दोषियों को आजीवन कारावास

रिपोर्ट:- सलीम खान

नैनीताल । वर्ष 2020 में भीमताल थाना क्षेत्र अंतर्गत काठगोदाम-भीमताल मार्ग पर हुए चर्चित नाजिम अली हत्याकांड में नैनीताल जिला न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रेम संबंधों के चलते रची गई साजिश में युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले में अदालत ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा निवासी अमरीन जहां और उसके साथी राधेश्याम शुक्ला को दोषी करार दिया है।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल की अदालत ने दोनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके अतिरिक्त अवैध हथियार रखने व प्रयोग करने के मामले में राधेश्याम शुक्ला को आर्म्स एक्ट के तहत तीन वर्ष का अतिरिक्त कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।

अभियोजन के अनुसार 2 जनवरी 2020 को दोपहर करीब ढाई बजे अमरीन जहां, निवासी इंद्रानगर हल्द्वानी, पूर्व नियोजित योजना के तहत अपने परिचित नाजिम अली को भीमताल घुमाने के बहाने साथ ले गई। उसी दौरान उसका साथी राधेश्याम शुक्ला मोटरसाइकिल से पीछे-पीछे चल रहा था। जब तीनों चंदा देवी मंदिर के पास हेयरपिन मोड़ पर पहुंचे तो वहां रुकने का बहाना बनाया गया।
यहीं पर साजिश को अंजाम दिया गया। अभियुक्त राधेश्याम शुक्ला ने पहले अमरीन, नाजिम और अपनी तस्वीरें खींचीं और फिर बेहद नजदीक से 315 बोर के तमंचे से नाजिम अली को गोली मार दी। वारदात के बाद वह मौके से फरार हो गया और परिजनों को घटना को सड़क दुर्घटना बताने की कोशिश की गई।

मृतक के भाई वाजिद अली खान, निवासी इंद्रानगर हल्द्वानी, ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि अमरीन ही नाजिम को अपने साथ ले गई थी और बाद में फोन पर सूचना मिली कि उसे गोली मार दी गई है। पुलिस ने इस मामले में अमरीन जहां और राधेश्याम शुक्ला के खिलाफ धारा 302, 120-बी व 25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया।

कोर्ट में बयान के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अमरीन और नाजिम के बीच अवैध संबंध थे। वहीं, बाद में अमरीन और राधेश्याम शुक्ला के बीच भी नजदीकियां बढ़ गई थीं। नाजिम द्वारा दूसरी लड़की से शादी कर लेने से अमरीन नाराज थी, जिसके चलते उसने अपने साथी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।

तत्कालीन थानाध्यक्ष कैलाश जोशी की विवेचना में पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। डीजीसी फौजदारी सुशील कुमार शर्मा की ओर से अदालत में 17 गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और घटनास्थल पर अभियुक्त द्वारा ली गई तस्वीरें पेश की गईं, जिनके आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।

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