April 18, 2026 03:51:31 pm

गुमनाम की मौत, इंसाफ का नाम: हरिद्वार पुलिस ने दरिंदगी का किया पर्दाफाश”

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“गुमनाम की मौत, इंसाफ का नाम: हरिद्वार पुलिस ने दरिंदगी का किया पर्दाफाश”

tahalka1news

हरिद्वार । राजाजी नेशनल पार्क के सुनसान जंगल में मिली एक लावारिस लाश… न कोई पहचान, न कोई अपना, और न ही कोई आंसू बहाने वाला। लेकिन इस गुमनाम शख्स की मौत को यूं ही दफन नहीं होने दिया हरिद्वार पुलिस ने।
करीब 45 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति खून से लथपथ हालत में जंगल में पड़ा मिला। सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और इंसानियत का परिचय देते हुए उसे अस्पताल पहुंचाया, इस उम्मीद में कि शायद उसकी सांसें चल रही हों। मगर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पहचान तक नहीं थी, लेकिन पुलिस ने उसे “अपना” मानते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज किया और इंसाफ दिलाने की ठान ली।
जांच शुरू हुई तो पुलिस टीम ने दिन-रात एक कर दिए। गंगा घाटों से लेकर बस अड्डों तक, चाय वालों से लेकर ऑटो चालकों तक हर किसी से पूछताछ की गई। डिजिटल सर्विलांस का सहारा लिया गया, लेकिन कातिलों ने कोई मोबाइल तक इस्तेमाल नहीं किया था, जिससे चुनौती और बढ़ गई।
आखिरकार 17 अप्रैल की सुबह हिल बाईपास के पास सूखी नदी के फ्लाईओवर पर दो संदिग्ध युवक दिखे। पुलिस को देखते ही भागने की कोशिश की, लेकिन कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सके। पकड़े गए आरोपियों की पहचान मनोज उर्फ चिकना (निवासी इटावा) और रोहित (निवासी पटना) के रूप में हुई।
पूछताछ में दोनों ने जो कहानी बताई, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाली थी। उन्होंने बताया कि 13 अप्रैल की रात शराब पीने के बाद सुबह एक साधु जैसे दिखने वाले व्यक्ति से बीड़ी मांगने के दौरान उसके पास पैसे देख लालच आ गया। पैसे मांगने पर मना करने और गाली देने से गुस्सा बढ़ा और दोनों ने मिलकर उसे धक्का दिया, पत्थरों से हमला किया और पैसे लूटकर फरार हो गए।
महज कुछ पैसों के लालच में एक बेगुनाह की जान ले ली गई, लेकिन इस गुमनाम मौत को भी इंसाफ दिलाने के लिए हरिद्वार पुलिस डटकर खड़ी रही।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि वर्दी सिर्फ कानून का प्रतीक नहीं होती, बल्कि उसमें इंसानियत भी बसती है।