जमीयत उलेमा उत्तराखंड ने जारी की ‘खिदमाते जमीयत’ रिपोर्ट: शिक्षा, राहत और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को बताया प्रमुख मिशन
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जमीयत उलेमा उत्तराखंड ने जारी की ‘खिदमाते जमीयत’ रिपोर्ट: शिक्षा, राहत और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को बताया प्रमुख मिशन
भारत देश हिंसा नफरत और फिरका प्रशस्ति से नहीं,भारत प्यार मोहब्बत और अमन चैन आपसी भाई चारे से चलता है, मौलाना अरशद मदनी
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कलियर।जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की उत्तराखंड इकाई ने शिक्षा, समाज सुधार, आपदा राहत, कानूनी सहायता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए “खिदमाते जमीयत उलेमा उत्तराखंड” रिपोर्ट जारी की है।
पिरान कलियर में स्थित जमीयत उलेमा हिंद के दफ्तर में आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी सम्मेलन के दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमीरुल हिन्द हजरत मौलाना सैय्यद अरशद मदनी साहब की मौजूदगी में पेश की गई।
सम्मेलन में प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। रिपोर्ट में संगठन की धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक, कानूनी और मानवीय सेवाओं को तथ्यों के साथ विस्तार से रखा गया है।
शिक्षा और समाज सुधार: सबसे बड़ी प्राथमिकता
अपनी तकरीर में मौलाना सैय्यद अरशद मदनी साहब ने साफ किया कि जमीयत उलेमा उत्तराखंड ने खुद को मस्जिद-मदरसे तक सीमित नहीं रखा। संगठन ने शिक्षा, समाज सुधार, आपदा राहत, कानूनी मदद, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सौहार्द के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को राशन, आर्थिक मदद, निर्धन छात्रों को किताबें-फीस और स्कॉलरशिप, बीमार लोगों को चिकित्सा सहायता दी गई। सामाजिक जागरूकता के लिए लगातार कैम्प और बैठकें आयोजित की गईं। युवाओं को नशे से दूर रखने, स्कूल और मदरसा दोनों की शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
इस्लाह-ए-मुआशरा बना मुख्य मिशन
मौलाना अरशद मदनी ने बताया कि इस्लाह-ए-मुआशरा यानी समाज सुधार को संगठन ने अपना प्रमुख मिशन बनाया है। इसके तहत नशाखोरी, दहेज प्रथा, शादियों में फिजूलखर्ची, अशिक्षा और पारिवारिक झगड़ों जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ उत्तराखंड के गांव-गांव तक जनजागरण अभियान चलाए गए। लोगों को समझाया गया कि तरक्की तभी होगी जब समाज से ये बुराइयां खत्म होंगी।
संवैधानिक मुद्दों पर कानूनी मोर्चा
जमीयत ने संवैधानिक और सामाजिक मुद्दों पर भी मजबूती से आवाज उठाई। रिपोर्ट में उल्लेख है कि समान नागरिक संहिता (UCC) के कुछ प्रावधानों को धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ मानते हुए संगठन ने कानूनी स्तर पर याचिका दायर की। हल्द्वानी दंगा प्रभावितों को न्याय दिलाने के लिए पीड़ित परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता दी गई और अदालत में उनका पक्ष रखा गया। नागरिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के हर मामले में जमीयत सक्रिय रही।
वक्फ संपत्ति और पर्यावरण पर विशेष ध्यान
वक्फ संपत्तियों के संरक्षण को लेकर भी जमीयत ने बड़ी पहल की है। रिपोर्ट बताती है कि वक्फ की जमीनों-इमारतों की सुरक्षा, उनके रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था पर काम किया गया, ताकि इनका सही इस्तेमाल समाज की भलाई में हो सके।
पर्यावरण संरक्षण को इबादत और सामाजिक जिम्मेदारी मानते हुए संगठन ने पौधारोपण अभियान चलाए। मौलाना मदनी ने लोगों से अपील की कि हरित और स्वच्छ उत्तराखंड बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
भविष्य की योजना
मौलाना अरशद मदनी साहब ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में जमीयत प्रदेशव्यापी शिक्षा जागरूकता अभियान शुरू करेगी। टीमें गांव-गांव जाकर ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल भेजने, मदरसों में आधुनिक शिक्षा जोड़ने और युवाओं को स्किल ट्रेनिंग से जोड़ने का काम करेंगी।
अंत में उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा उत्तराखंड का मूल उद्देश्य शिक्षा, सेवा, इंसानियत, सामाजिक सौहार्द और संविधान की रक्षा करना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राहत, तालीम, समाज सुधार और एकता के लिए संगठन की खिदमत आगे भी और ज्यादा मजबूती से जारी रहेगी।
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