ऑपरेशन फेक पिल: नकली दवाओं की फैक्ट्री पर STF का बड़ा एक्शन, 24 घंटे में दूसरी बड़ी कार्रवाई
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ऑपरेशन फेक पिल: नकली दवाओं की फैक्ट्री पर STF का बड़ा एक्शन, 24 घंटे में दूसरी बड़ी कार्रवाई
मानव जीवन से खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा: कोटद्वार में सील हुई फर्जी दवा फैक्ट्री, कोरोना काल में नकली रेमडेसिविर बनाने के भी लगे थे आरोप
tahalka1news
देहरादून/कोटद्वार। उत्तराखंड में नकली दवाओं के कारोबार पर शिकंजा कसते हुए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने “ऑपरेशन फेक पिल” के तहत एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मुख्यमंत्री के “ड्रग्स फ्री देवभूमि” अभियान और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशों के क्रम में एसटीएफ लगातार नकली दवा माफियाओं के खिलाफ अभियान चला रही है। इसी कड़ी में कोटद्वार क्षेत्र स्थित एक अवैध दवा फैक्ट्री को सील कर भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद की गई। यह STF की 24 घंटे के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
एसटीएफ को लगातार इनपुट मिल रहे थे कि कोटद्वार के सिडकुल सिगड्डी क्षेत्र में स्थित मैसर्स नैक्टर हर्ब्स एंड ड्रग्स नामक फैक्ट्री में अवैध रूप से औषधियों का निर्माण किया जा रहा है। सूचना की पुष्टि होने पर एसटीएफ टीम ने औषधि विभाग, राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से फैक्ट्री में छापेमारी की।
निरीक्षण के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अधिकारियों ने पाया कि उक्त फैक्ट्री का औषधि निर्माण लाइसेंस वर्ष 2024 में ही निरस्त किया जा चुका था, इसके बावजूद परिसर में मशीनें, टैबलेट निर्माण उपकरण और निर्माण सामग्री मौजूद थी। मौके से लगभग 03 किलोग्राम कम्प्रेस्ड टैबलेट और टैबलेट निर्माण में इस्तेमाल होने वाले 34 पंच उपकरण बरामद किए गए।
प्रथम दृष्टया मामला औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के गंभीर उल्लंघन का पाया गया। बिना वैध लाइसेंस दवा निर्माण करना कानूनन अपराध है और इससे लोगों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ होता है। इसी आधार पर फैक्ट्री को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया और बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि उक्त फैक्ट्री पहले भी विवादों में रह चुकी है। वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के दौरान इस फैक्ट्री पर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने के आरोप लगे थे। वहीं वर्ष 2024 में तेलंगाना पुलिस ने भी यहां छापेमारी कर नकली दवाओं के रैपर और भारी मात्रा में संदिग्ध दवाएं बरामद की थीं। इसके बावजूद अवैध गतिविधियों का जारी रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
फैक्ट्री स्वामी की पहचान विशद कुमार पुत्र भीम सिंह निवासी गली नम्बर-1, चांदपुर, जनपद बिजनौर उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। STF अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि नकली दवाओं की सप्लाई किन-किन राज्यों तक की जा रही थी।
इस कार्रवाई में निरीक्षक यादविंदर सिंह बजवा, उप निरीक्षक दीपक मेठाणी, अपर उप निरीक्षक योगेन्द्र चौहान, कांस्टेबल रवि पंत, दीपक चन्दोला, प्रशान्त चौहान और दीपक नेगी सहित STF टीम के सदस्य शामिल रहे। वहीं संयुक्त टीम में वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार, औषधि निरीक्षक सीमा बिष्ट, नायब तहसीलदार राजेन्द्र सेमवाल और राजस्व निरीक्षक आशीष कैमनी भी मौजूद रहे।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक STF ने आम जनता से अपील करते हुए कहा है कि यदि कहीं भी अवैध दवा निर्माण, नकली दवाओं के कारोबार या बिना लाइसेंस संचालित फैक्ट्री की जानकारी मिले तो तुरंत STF अथवा संबंधित विभाग को सूचित करें। उन्होंने कहा कि मानव जीवन और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।
STF ने जनता से केवल अधिकृत एवं लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदने की अपील की है। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक STF का मोबाइल नंबर 9412029536 जारी किया गया है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि सूचनाकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

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